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वर्तमान समय में बच्चों को मोबाइल की लत (Child Mobile Addiction) लगती जा रही है और इसके कारण उनका शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित हो रहा हैं । वे न तो किसी Physical Activities में रुचि दिखाते हैं और न ही किसी Creative Activity में participate करते हैं और इन सब का कारण मोबाइल हैं । वे हर समय मोबाइल पकड़े रहते हैं । जो जागरूक parents हैं, उन्होंने कभी न कभी इस समस्या को महसूस जरूर किया होगा ।
तो चलिए अब जानते हैं कि इस समस्या से किस प्रकार बचा जा सकता हैं ।

अपनी बात को मैं 2 भागों में विभाजित करके कहना चाहूँगा
- 0 से लेकर 6 साल तक के बच्चों के लिए ।
- 7 से लेकर 15 साल तक के बच्चों के लिए ।
Tips To Keep Child Away From Smartphone
0 से लेकर 6 साल तक के बच्चों के लिए
1-आप स्वयं मोबाइल न देखें –
बच्चे आपको Copy करते हैं । तो यदि आप चाहते हैं कि आप का बच्चा मोबाइल से दूर रहे तो सबसे पहले आपको मोबाइल से दूर रहना होगा । वर्तमान समय में ऐसा करना थोड़ा कठिन होगा पर आप कर सकते हैं । कोशिश कीजिए कि बच्चे के सामने मोबाइल हाथ में न रहे । यदि जरूरी हैं, तो दूसरे कमरे में जा कर कुछ देर आप मोबाईल पर अपना काम कर सकते हैं । यदि आपके हाथ में मोबाइल नहीं रहेगा तो फिर बच्चें को हाथ में भी मोबाइल नहीं रहेगा ।
2– खाना खाते समय बच्चों को मोबाइल न दें
माँ बच्चों को खाना खाते समय मोबाइल दे देतीं हैं और बच्चे आसानी से खाना खा लेते हैं । शुरूआत में तो सब ठीक लगता हैं पर बच्चों को फिर मोबाइल की लत लग जाती हैं, और बिना मोबाइल के फिर वे खाना नहीं खाते ।
खाते समय मोबाइल देखने से उनका ध्यान मोबाइल पर रहता हैं, और वे खाना ठीक से चबाते नहीं हैं । कई बार तो काफी देर तक खाना मुह में भरे रहते हैं । आयुर्वेद के अनुसार खाते समय आपका ध्यान सिर्फ खाने पर होना चाहिए अन्यथा खाना ठीक से नहीं पचेगा और आपका पेट खराब रहेगा । बच्चों के पेट का ठीक न रहने की एक वजह मोबाइल भी हो सकती हैं ।
3 – घर के काम करते समय बच्चों को मोबाइल न दें
कई बार मातायें घर के काम जैसे किचन के काम या कपड़े धोना आदि आसानी से करने लिए बच्चों को मोबाइल दे देतीं हैं ताकि बच्चें उन्हें परेशान न करें और वे अपना काम आसानी से कर सकें । और इसी से बच्चों को मोबाइल की लत लग जाती हैं ।
जब आप घर के काम करें तो बच्चों को कोई Creative खिलौना दे दें । या जो खिलौना उसे अच्छा लगता है, वो दे दें । परन्तु यदि इतने पर भी वह रोता है, तो उसे अपने साथ रखे, पर मोबाइल न दें । यह आपके बच्चे के मानसिक विकास का सवाल है ।

4-बच्चों को किसी Art में Involve करें
बच्चे मोबाइल को कम देंखें, इसके लिए सबसे ज्यादा आवश्यक हैं कि उन्हें किसी Art में Involve रखा जायें । कुछ बच्चों में तो यह Inbuilt होता हैं । पर कुछ को यदि आप ऐसा Atmosphere दें तो वें उसमें Involve हो जाते हैं । ये Art कुछ भी हो सकती हैं, जैसे- Singing, music, Dance etc..और इनके द्वारा बच्चों में सकारात्मक आदतों का विकास होता हैं । और बच्चें इसमें बहुत जल्दी तरक्की करते हैं ।
“बच्चें कच्ची मिट्टी की तरह होते हैं, आप उन्हें जैसे साँचे में ढालेंगे वे उसी में ढ़ल जायेंगे । अब यह आप पर निर्भर करता हैं कि उन्हें आप किस साँचे में ढ़ालना चाहते हैं” ।
यदि हम यह चाहते हैं कि बच्चें मोबाइल न देखें, तो हमें उन्हें किसी न किसी काम में व्यस्त रखना होगा । आप उन्हें रचनात्मक कार्यों में व्यस्त रखें । आप उन्हें कहानी सुनायें । उन्हें Creative खिलौने खेलने के लिए दें । उन्हें Drawing & Coloring जैसे कामों में लगायें । उन्हें प्रार्थना करना सिखायें । उन्हें रामायण और पुराणों की कथायें सुनायें । इससें उनका आध्यात्मिक विकास तो होगा ही और साथ में वें मोबाइल से भी दूर रहेंगे । मैं आशा करता हूँ कि इन सबके द्वारा 0 से लेकर 7 साल तक के बच्चों को मोबाइल की लत से बचाया जा सकता हैं ।
अब बात करते हैं उन बच्चों की जो 7 साल से लेकर 15 साल तक के Age group में आते हैं
1-बच्चों को एक निश्चित समय के लिए मोबाईल दें और निगरानी रखें
जब बच्चें स्कूल जाने लगते हैं, तो उन्हें मोबाइल की आवश्यकता पड़ने लगती है । जब से online classes ने जोर पकड़ा हैं तब से तो और भी ज्यादा ।
तो बच्चों एक निश्चित समय के लिए मोबाइल दें और सिर्फ पढ़ाई के काम के लिए । और आप उन पर निगरानी रखें । कई बार आपको ऐसा लग सकता है कि यह कुछ ज्यादा हो रहा है, पर बच्चों के उचित विकास के लिए यह आवश्यक हैं ।
“मोबाईल पर Game खेलने या Video देखने से बेहतर हैं कि उन्हें किसी Creative या Performing Art में लगाया जाये या Outdoor Games खेलने दिया जाये”
2-बच्चों को दूसरे बच्चों की नकल करने से बचाया जाये
कई बार बच्चे केवल इसलिए मोबाइल माँगते हैं, क्यों कि उनकी class के बच्चे इस तरह का मोबाइल लाते हैं या रखते हैं ।
आप की यह जिम्मेदारी हैं कि आप बच्चों को इस तरह की नकल से बचायें और उन्हें अपने घर की परिस्थिति से अवगत करायें । उनके उचित विकास के लिए यह आवश्यक है कि –
“वे अपनी क्षमताओं को समझें, अपने घर की परिस्थितियों को समझें, अपने मन की अवस्थाओं को समझे और तरक्की करें”
3-बच्चों को बीच-बीच में समझायें की मोबाइल का सकारात्मक उपयोग कैसे करें
“यदि एक चाकू एक लुटेरे के हाथ में हैं, तो वह उससे किसी को जान से मार सकता है, और वही चाकू यदि किसी डॉक्टर के हाथ में है, तो वह उससे किसी की जान बचा सकता है”
चाकू वही है, पर एक उसका नकारात्मक उपयोग कर रहा है, और दूसरा उसका सकारात्मक उपयोग ।
इसलिए मोबाइल वही है, हम उसका सकारात्मक उपयोग भी कर सकते हैं और नकारात्मक भी । हमें अपने बच्चों को समझाना होगा कि मोबाईल का सकारात्मक उपयोग कैसे करें । बीच-बीच मे बच्चों के साथ बात-चीत करें और उन्हें समझायें । इससे बच्चों के साथ आपका Communication भी अच्छा होगा और मोबाइल का सकारात्मक उपयोग भी होगा ।

4-बच्चों को समय की Value बतायें
जब तक बच्चें समय की Value नहीं समझेंगे तब तक वे समय को बर्बाद ही करेंगे । मोबाइल पर, Social Media पर, बेकार की गप-सप में । इसलिए यह बहुत आवश्यक है कि बच्चों को समय के मूल्य के बारे में बचपन से पता हो । और वे अपने समय का उचित उपयोग करना जानते हो । ताकि वे अपने समय का सदोपयोग करके उन्नति कर सकें ।
“भगवान ने सभी को 24 घण्टे का ही समय दिया है, उसी का उपयोग करके कुछ लोग महान कार्य करते है, जबकि कुछ लोग महान गर्त में गिरते हैं” ।
5-आप स्वयं भी अपने पर नियन्त्रण रखें
मैं पहले भी कह चुका हूँ कि बच्चे आपको Copy करते हैं, अगर आप दिन भर मोबाइल लिये रहेंगे और बच्चो को मोबाइल से दूर रहने के लिए कहेंगे तो फिर वे कभी भी मोबाइल से दूर नहीं रहेंगे।
आपको स्वयं भी मोबाईल से दूरी बनानी होगी और Social Media से भी । अपने आप को भी सदा Creative Work में व्यस्त रखें, ताकि बच्चे आपसे प्रेरणा लें ।
6-आध्यात्मिक गतिविधियों को अपनी दिनचर्या में सामिल करें
“आध्यात्मिक गतिविधियाँ आपको सकारात्मक बनातीं हैं और एक सुदृढ़ दिनचर्या प्रदान करतीं हैं” ।
अगर आप आध्यात्मिक गतिविधियों को अपनी दिनचर्या में सामिल करते हैं, तो आपको मोबाइल पर videos देखने, Games खेलने या Social Media के लिए समय ही नहीं मिलेगा । सुबह-शाम भगवान की आरती, भगवान की सेवा, Meditation, Japa, आध्यात्मिक पुस्तको का अध्ययन इन सभी को अपनी दिनचर्या में सामिल करें । और अपने बच्चों को भी इसके लिए Encourage करें । क्यों कि वे आपको देख कर ही सीखतें हैं ।

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एक बार दिल्ली मैट्रो में एक 10-12 साल की बच्ची को किताब पढ़ते देख एक बुजुर्ग महिला ने उसकी माँ से प्रश्न किया कि आज के समय में जब सब बच्चे मोबाईल लिए रहते हैं तब आपकी बच्ची को किताब पढ़ने की आदत कैसे लग गयी ?? तब उसकी माँ द्वारा दिया गया उत्तर मेरे लिए मार्गदर्शन बन गया । उसकी माँ मे उत्तर दिया – “क्यों कि मेरे हाथ में किताब हैं, इसलिए उसके हाथ में भी किताब हैं” । हमें आज ऐसी ही माताओं की आवश्यकता है ।
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